Friday, September 11, 2015

Non stop Hansi

If 'muuaah' is a Kiss..:* Then... . . . . . . . . . . . 'Kalmuuaah' is promise to kiss tomorrow...!!

No Claps plzzz...!!☺

I hate publicity....✋.        

I m the best.
I can prove it.

I can put Coffee in coffee cup.Can you put world in World Cup?

OK 1 more ☝

I can send my Address on your Mobile.
Can you send your Mobile on my Address?

Nahi..Ok OK

I can eat Cream Biscuits with Cream.
Can you eat Tiger Biscuit with tiger?
Kaha na only I m the Best...

Ab apne naam se sab ko mat 4ward Karna, Kyoki isse sachai nai badal jayegi.

Dost kaminey hone chaahiye;
Co-operative to Banks bhi hote hai.

Acha ☝aur

Becoz of Global Warming........

Our Next generation will not b able to see Tigers !!!!
.
.
.
.
Toh
Hum kya kare?

Humne bhi to Dinosaur nahi dekha hai.

Kabhi Shikayat ki kya?
ye wala last

Only 940 girls are left for every 1000 boys
in India .........
SAVE GIRLS !!!
..
we can save the tigers later....
.
Bike pe piche ladki chahiye ya tiger ??
.
.
choice is yours....
Janhit Mein Jaari.... bachao Naari..!!

ye wala final

Ghor Kalyug

Teacher: Who was Akbar ? 
Boy: Akbar was Gay.

Teacher:- What, Are you mad ? Why did you say that?

Boy:- We have heard Laila - Majnu , Heer -Ranjha , Soni- Mahival ,Romeo-Juliet 
But Only
Akbar - Birbal !
Teacher diedBilkul Latest ......
Sidha Hospital se  ...........
...................................................................

✋ bus ye wala last

Kareena ko ladka hua, Bilkul kaala.
Saif ne kaha: Tu gori, Main gora ladka kaise kala...?
Kareena Replied :::
Tu Hot , Main Hot ...
Jal Gaya Saala...... I

Wednesday, September 2, 2015

Sanskaar - Mahatav

कहानी - किस्से आपने खूब पढ़े होंगे मगर जो बात मैं आपसे कहने जा रहा हूं वह अगर आपके मर्म को छू जाए तो अपने बच्चों को अवश्य बताएं : -

पढ़ाई पूरी करने के बाद एक छात्र किसी बड़ी कंपनी में नौकरी पाने की चाह में इंटरव्यू देने के लिए पहुंचा....

छात्र ने बड़ी आसानी से पहला इंटरव्यू पास कर लिया...

अब फाइनल इंटरव्यू
कंपनी के डायरेक्टर को लेना था...

और डायरेक्टर को ही तय
करना था कि उस छात्र को नौकरी पर रखा जाए या नहीं...

डायरेक्टर ने छात्र का सीवी (curricular vitae)  देखा और पाया  कि पढ़ाई के साथ- साथ यह  छात्र ईसी (extra curricular activities)  में भी हमेशा अव्वल रहा...

डायरेक्टर- "क्या तुम्हें  पढ़ाई के दौरान
कभी छात्रवृत्ति (scholarship)  मिली...?"

छात्र- "जी नहीं..."

डायरेक्टर- "इसका मतलब स्कूल-कॉलेज  की फीस तुम्हारे पिता अदा करते थे.."

छात्र- "जी हाँ , श्रीमान ।"

डायरेक्टर- "तुम्हारे पिताजी  क्या काम  करते  है?"

छात्र- "जी वो लोगों के कपड़े धोते हैं..."

यह सुनकर कंपनी के डायरेक्टर ने कहा- "ज़रा अपने हाथ तो दिखाना..."

छात्र के हाथ रेशम की तरह मुलायम और नाज़ुक थे...

डायरेक्टर- "क्या तुमने कभी  कपड़े धोने में अपने  पिताजी की मदद की...?"

छात्र- "जी नहीं, मेरे  पिता हमेशा यही चाहते थे
कि मैं पढ़ाई  करूं और ज़्यादा से ज़्यादा किताबें
पढ़ूं...

हां , एक बात और, मेरे पिता बड़ी तेजी  से कपड़े धोते हैं..."

डायरेक्टर- "क्या मैं तुम्हें  एक काम कह सकता हूं...?"

छात्र- "जी, आदेश कीजिए..."

डायरेक्टर- "आज घर वापस जाने के बाद अपने पिताजी के हाथ धोना...
फिर कल सुबह मुझसे आकर मिलना..."

छात्र यह सुनकर प्रसन्न हो गया...
उसे लगा कि अब नौकरी  मिलना तो पक्का है,

तभी तो  डायरेक्टर ने कल फिर बुलाया है...

छात्र ने घर आकर खुशी-खुशी अपने पिता को ये सारी बातें बताईं और अपने हाथ दिखाने को कहा...

पिता को थोड़ी हैरानी हुई...
लेकिन फिर भी उसने बेटे
की इच्छा का मान करते हुए अपने दोनों हाथ उसके
हाथों में दे दिए...

छात्र ने पिता के हाथों को धीरे-धीरे धोना शुरू किया.

साथ ही उसकी आंखों से आंसू भी झर-झर बहने लगे...

पिता के हाथ रेगमाल (emery paper) की तरह सख्त और जगह-जगह से कटे हुए थे...

यहां तक कि जब भी वह  कटे के निशानों पर  पानी डालता, चुभन का अहसास
पिता के चेहरे पर साफ़ झलक जाता था...।

छात्र को ज़िंदगी में पहली बार एहसास हुआ कि ये
वही हाथ हैं जो रोज़ लोगों के कपड़े धो-धोकर उसके
लिए अच्छे खाने, कपड़ों और स्कूल की फीस का इंतज़ाम करते थे...

पिता के हाथ का हर छाला सबूत था उसके एकेडैमिक कैरियर की एक-एक
कामयाबी का...

पिता के हाथ धोने के बाद छात्र को पता ही नहीं चला कि उसने  उस दिन के बचे हुए सारे कपड़े भी एक-एक कर धो डाले...

उसके पिता रोकते ही रह गए , लेकिन छात्र अपनी धुन में कपड़े धोता चला गया...

उस रात बाप- बेटे ने काफ़ी देर तक बातें कीं ...

अगली सुबह छात्र फिर नौकरी  के लिए कंपनी के  डायरेक्टर के ऑफिस में था...

डायरेक्टर का सामना करते हुए छात्र की आंखें गीली थीं...

डायरेक्टर- "हूं , तो फिर कैसा रहा कल घर पर ?
क्या तुम अपना अनुभव मेरे साथ शेयर करना पसंद करोगे....?"

छात्र- " जी हाँ , श्रीमान कल मैंने जिंदगी का एक वास्तविक अनुभव सीखा...

नंबर एक... मैंने सीखा कि सराहना क्या होती है...
मेरे पिता न होते तो मैं पढ़ाई में इतनी आगे नहीं आ सकता था...

नंबर दो... पिता की मदद करने से मुझे पता चला कि किसी काम को करना कितना सख्त और मुश्किल होता है...

नंबर तीन.. . मैंने रिश्तों की अहमियत पहली बार
इतनी शिद्दत के साथ महसूस की..."

डायरेक्टर- "यही सब है जो मैं अपने मैनेजर में देखना चाहता हूं...

मैं यह नौकरी केवल उसे  देना चाहता हूं जो दूसरों की मदद की कद्र करे,
ऐसा व्यक्ति जो काम किए जाने के दौरान दूसरों की तकलीफ भी महसूस करे...

ऐसा शख्स जिसने
सिर्फ पैसे को ही जीवन का ध्येय न बना रखा हो...

मुबारक हो, तुम इस नौकरी  के पूरे हक़दार हो..."

आप अपने बच्चों को बड़ा मकान दें, बढ़िया खाना दें,
बड़ा टीवी, मोबाइल, कंप्यूटर सब कुछ दें...

लेकिन साथ ही  अपने बच्चों को यह अनुभव भी हासिल करने दें कि उन्हें पता चले कि घास काटते हुए कैसा लगता है ?

उन्हें  भी अपने हाथों से ये  काम करने दें...

खाने के बाद कभी बर्तनों को धोने का अनुभव भी अपने साथ घर के सब बच्चों को मिलकर करने दें...

ऐसा इसलिए
नहीं कि आप मेड पर पैसा खर्च नहीं कर सकते,
बल्कि इसलिए कि आप अपने बच्चों से सही प्यार करते हैं...

आप उन्हें समझाते हैं कि पिता कितने भी अमीर
क्यों न हो, एक दिन उनके बाल सफेद होने ही हैं...

सबसे अहम हैं आप के बच्चे किसी काम को करने
की कोशिश की कद्र करना सीखें...

एक दूसरे का हाथ
बंटाते हुए काम करने का जज्ब़ा अपने अंदर
लाएं...

यही है सबसे बड़ी सीख..............

आप सभी  से निवेदन है  कि  उक्त कहानी से सीख लें और अपने परिवार पर इसका प्रयोग कर अपने बच्चों को सर्वोच्च शिक्षा प्रदान करें।

Tuesday, September 1, 2015

Ek Sawal.. jisa koi jawab nahi.. Caste Reservation

स्कूल से एक 6th क्लास का बच्चा अपने घर आ कर अपनी माँ से पूछता है - "माँ ये SC और ST क्या हैं ?"
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माँ: बेटा ये तुम्हे क्यों जानना है ??
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बच्चा: माँ आज सर हमसे पूछ रहे थे की कौन-कौन SC ST का हैं !!!!!
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माँ: बेटा उन्होंने ऐसा क्यों पूछा, उन्होंने नहीं बताया क्या ??
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बच्चा:- बताया, पर सिर्फ इतना कि जो जो SC ST के हैं उन्हें पैसे मिलेंगे.....!
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पर माँ ये क्या होता हैं??
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माँ: बेटा हमारे सविधान में 4 कास्ट बनायीं है SC ST Obc और General
तो सरकार उन्हें गरीब और पिछड़े हुए लोगो को मदद करने के लिए सुविधा दी हैं।
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बच्चा: पर माँ सिर्फ उन्हें ही क्यों मिलती हैं और मेरा दोस्त तो गरीब भी नहीं हैं फिर
भी उसे मिलेगे पैसे ..ये सुविधा गरीब के लिए हैं तो हम भी गरीब है न तो हमको क्यों नहीं मिलेंगे पैसे??
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माँ: बेटा ये सविधान में लिखा है ।
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बेटा: पर माँ सविधान के बारे में कहा था की सब को एक जैसा हक़ है तो फिर ये क्यों ??
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माँ: बेटा ये सब राजनीति का गन्दा खेल हैं उनकी वजह से आज धर्म और जाति के नाम पर लोग एक सामान नही हैं....!
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बेटा: पर माँ हम क्या हैं जिस से हम को पैसे नहीं मिलेगे ।
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माँ: बदनसीब।
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हम लोग बदनसीब है बेटा ।
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पूरे विश्व में कही पर इस तरह का नियम नहीं है बस हमारे भारत में है ये सुविधा । ...सविधान निर्माता ने इसको सिर्फ 10 वर्ष के लिए रखा था पर ये देश के दलालो ने इसको पूर्ण रूप से लागू कर दिया ।
....अगर इन्हें लागू करना ही है तो राजनीति में भी लागू करना चाहिए मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री भी SC और ST का होना चाहिए तब पता चलेगा उन्हें भी ।
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बेटा: माँ क्या आगे भी मुझे इसी तरह की दिक्कत होगी ???
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माँ: हाँ बेटा ।
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आगे तुझे पढ़ाई में,नोकरी में ,प्रमोशन में, हर जगह दिक्कत आएगी ...
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जातिवाद का जहर तुझे मजबूर कर देगा और तू कितना भी सहन कर ले एक दिन तू जरूर बोलेगा की ये कोटा बंद करो ।
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बेटा: माँ तो क्या हमारी मदद कोई नहीं करेगा काश में भारत छोड़ कही और पैदा हुआ होता ।
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माँ: ऐसा नहीं बोलते बेटा इस धरती को हमारे पूर्वजो ने खून से सींचा हैं और बलिदान दिया है तुम्हे गर्व होना चाहिए की तुम एक भारतीय हो ।
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बस ये सत्ता के भूखे लोग हमारी गरीबी दूर करने के बजाये वोट पाने की होड़ में हैं ।
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बेटा: माँ मेरा दोस्त बोलता हैं की पैसे मिलेगे तो पार्टी करेगे. माँ हमें एक रोज
की रोटी बड़ी मुश्किल से मिलती हैं और मेरे दोस्त पार्टी करेगे । माँ में नहीं जाउगा स्कूल कल से ।
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माँ: नहीं बेटा तुम रोज स्कूल जाओ और पढ़ो ....पढ़ लिख कर शायद तुम इस कोटा को बदल दो.....
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बेटा : हा माँ में खूब पढूंगा पर हमारे पास इतने पैसे नहीं हैं की आगे पढ़ सकूँ...!!!
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माँ: तू चिंता न कर मैं काम करुँगी न तेरी पढ़ाई के लिए |

Real Meaning for Reservation

एक रियल घटना

पान की दुकान पर खडे एक 30 वर्षीय S T कास्ट के युवक से बातचीत के कुछ अंश ...

मैने पूछा कुछ कमाते धमाते क्यो नहीं...?

वह बोला - क्यो.?

मै बोला शादी कर लो ...?

वह बोला हो गई ..

कैसे ..??

वह बोला -मुख्यमंत्री कन्यादान योजना मे...

मे बोला फिर बाल बच्चों के लिये कमाओ...?

वह बोला - जननी सुरक्षा से डिलेवरी फ्री और साथ मे 1400 रू का चेक...

मेने बोला बच्चो कि पढ़ाई लिखाई के लिये कमाओ..?

वह बोला उनके लिये पढ़ाई और भोजन फ्री...
साथ में  लड़का MBBS कर रहा है उसे स्कोलरशिप भी मिलती है उस से हम ऐस करते हे
मैने बोला यार घर कैसे चलाते हो वह बोला-
छोटी लड़की को अभी वसुन्धरा सरकार से स्कूटी मिली है
1रू किलो गेंहू और चावल से...!

मै झुझला कर बोला यार माॅ बाप को तीर्थयात्रा के लिये तो कमा ...??

वह बोला दो धाम करवा दिये है मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा से...!

मुझे गुस्सा आया और मैंने बोला-
माॅ बाप के मरने के बाद जलाने के लिये कमा..?

वह बोला 1 रू मे विद्युत शवदाह गृह है..!

मैंने कहा तेरे बच्चो कि शादी के लिये कमा..?

वह मुस्कुराया और बोला -
फिर वहीं आ गये... वैसे ही होगी जैसे मेरी हुई थी...!!

? यार एक बात बता ये इतने अच्छे कपडे तू कैसे पहनता है ?

वह बोला राज की बात है..फिर भी मै बता देता हूँ...

"सरकारी जमीन पर कब्जा करो आवास योजना मे लोन लो और फिर मकान बेच कर फिर जमीन कब्जा कर पट्टा ले लो...!!"

ज्यादा कोई 3- 5 करे तो सालो को झुटे atrocity(जातिसूचक) केस में अंदर करवा दो, फिर लाख दो लाख समझोता करने के लिए ऑफर आ जायेंगे
ये है असली आरक्षण

दोस्तों इसे सब grp में भेजे सरकार को पता चले की हमारी मेहनत की कमाई कैसे लुटा कर लोगो को मक्कार बना रही हे।
जय हिन्द जय भारत

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